Story of poor Farmer

एक किसान (farmer) की कहानी आज हम सुनाने जा रहे है जो हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होने के साथ – साथ हमारे जीवन को सुखी भी बनाते है। लेकिन हम लोगो को इनका महत्व दिखाई नहीं पड़ती। आज इन्हीं के बारे में थोड़ी सी कहानी किसान (Farmer) भाई की लेकर आया हूं। अगर आप पढ़ते हैं तो शायद समझ में आए। कि हमारे जीवन में किसान (farmer) भाई साहब की कितनी बड़ी महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

जिसने हमारी धरती उपजी
जिन पर हमें अभिमान है
कर लो इज्जत इनकी अब
इन्हीं से हमारी जान है,
हां यही तो किसान है।
हां यही तो किसान है।
धूप में ये जलते हैं,
नंगे पांव ये चलते हैं।
करते ना आराम है
फिर भी करता ना
कोई सम्मान है
हां यही तो किसान है
हां यही तो किसान है।

तो आइए बढ़ते हैं कहानी की ओर,जो एक इंसान से शुरू होकर एक इंसान पर ही खत्म होती है।

एक आदमी नंदन नाम का जो एक छोटे से गांव में अपने बीवी बच्चों के साथ रहता था। वो काफी ग़रीब था ना ही उसके पास जमीन थी, जिससे वह खेती कर सके। और ना ही रुपए। बस एक छोटा सा घर था जिसमें उसका अपने परिवार के साथ गुज़ारा होता था। उसके पास कोई काम भी नहीं था, और ना ही उसके पास रुपए थे।

जिसकी वजह से उसे काफी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा था। और काम की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था। उसके घर से कुछ दूर पर एक घर था।जो काफी बड़ा ओर सुंदर था। जिसका पूरा परिवार शहर में रहता था। उस घर के कुछ सदस्य गांव आए हुए थे। और खेतों में काम करवाना था उन्हें। उन्होंने गांव के कुछ लोगों को बुलाया। जिसमें वह आदमी (नंदन) भी था। उनका पूरा परिवार गांव में रहता था,जिसकी वजह से खेतों की देखभाल नहीं हो पाती थी। इसलिए वह अपना काम गांव के मजदूरों को रुपए देकर कराया करते थे। लेकिन उन्हें कोई एक जिम्मेदार इंसान चाहिए था। जो उनके खेतों की देखभाल करें और उसी में खेती करें।

शहरी बाबू ने सभी किसान (farmer) को काम बता दिया। और उन्हें काम करने के लिए बोला। सभी किसान (farmer) काम करने के लिए खेत में चले गए। और काम खत्म करके शाम तक साहब के पास गए और सभी अपनी मजदूरी का रुपए लेकर घर जाने लगे तभी मालिक की नजर उस किसान (farmer) (नंदन) पर पड़ी। जो बहुत परेशान और दुखी था। तभी मालिक नंदन से बोलते है।

मालिक – यहां आओ
नंदन – जी मालिक
मालिक – क्या हुआ रुपए तो मिल गया ना,अब क्यों परेशान दिख रहे हो?
नंदन – मालिक बात वो है कि मेरे पास कोई काम नहीं है और मुझे रुपयों की जरूरत है। मुझे आज आपने रुपए दिए जिससे घर का कुछ खर्चा तो चल जाएगा। लेकिन कल के लिए फिर इधर-उधर काम की तलाश में भटकना पड़ेगा। और काम मिले ना मिले।

मालिक कुछ सोचने लगा और बोला।

मालिक – नंदन कल सुबह तुम मेरे घर आओ।
नंदन – जी मालिक

फिर नंदन अपने घर गया। और मजदूरी से मिले रुपयों से अपने घर के लिए कुछ राशन पानी और बच्चो के लिए खाने पीने का सामान ले गया,जिसे पाकर बच्चे बहुत खुश हुए।

अगली सुबह होते ही नंदन अपने मालिक के घर पहुंच गया।

मालिक – नंदन अंदर आ जाओ
नंदन मालिक के साथ अंदर गया और मालिक उससे बोलने लगा।
नंदन मेरा पूरा परिवार शहर में रहता है। और यहां पर इतनी खेती है। जिसका देखभाल करने वाला कोई है नहीं है । इसलिए मैं चाहता हूं कि मेरे खेतों की देखभाल तुम करो। अगर तुम चाहो तो, और जितना भी खेती में उपजाओगे, उसका एक तिहाई हिस्सा तुम ले लिया करना।

नंदन – मालिक आप मेरे लिए फरिश्ता बन कर आए हैं। यह मेरा सौभाग्य होगा। मालिक मैं खेतों की देखभाल जरूर करूंगा। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद मालिक।

इसी के साथ नंदन की अपनी मेहनत ने खेतों की उपज में काफी बढ़ोत्तरी कर मालिक के विश्वास को बढ़ा दिया। नंदन इसी के साथ उनके खेती की सेवा और अपनी मेहनत कर अपने परिवार का पालन पोषण कई सालों तक करता रहा।ओर अपने परिवार के साथ सुखी सुखी रहता रहता था।

1 दिन नंदन खेतों में काम कर रहा था। तभी उसको अचानक खबर मिली कि मालिक को हार्ट अटैक आया है। नंदन सब कुछ छोड़कर शहर जाने के लिए रवाना हो गया। वहां पहुंचते ही उसे पता चलता है कि मालिक अब नहीं रहे। आंखों में आंसू भरे हुए नंदन वहा से चुपचाप वापस अपने गांव आ गया।
कुछ दिनों बाद मालिक के घर वाले अपने गांव आए। और खेतों में आकर किसी इंसान को खेत दिखाने लगे। नंदन समझ नहीं पा रहा था,कि ये लोग कर क्या रहे है। खेत दिखाकर वो घर चले गए।
लेकिन नंदन सोच में पड़ गया कि आखिर ये हो क्या रहा था। यही पूछने के लिए नंदन मालिक के घर पहुंचा। और घर के अंदर जाकर मालिक के भाई से पूछने लगा। मालिक ये लोग कौन थे जिनको आप खेत दिखा रहे थे।

मालिक के भाई- हा नंदन तुमको मै बताना ही भूल गया। मै अब ये खेत बेच रहा हूं। यहां पर अब बिल्डिंग्स बनेगी। बस इसीलिए बिल्डर्स को दिखाने आया था खेत।

नंदन – मालिक लेकिन यहां पर मैं खेती करता हूं। वहां बिल्डिंग कैसे बन सकती है। मालिक कृपया ऐसा ना करे।

मालिक का भाई – नंदन,यहां हमारे परिवार का कोई नहीं रहना चाहता। और मै भी शहर से गांव आ जा नहीं सकता। शहर में मेरे पास बहुत सारा काम रहता है। इसलिए मैं खेतों को बेच रहा हूं। कर उन लोगो को ये जगह बहुत अच्छी लगी है। वो यहां बिल्डिंग बनाने के लिए जल्दी कर रहे है। ये बात सुनकर किसान (Farmer) (नंदन) बिना कुछ बोले वहा से घर चला जाता है।

अगली सुबह नंदन खेतों में जाता है और वही पर काफी देर बैठा रहता है। काफी परेशान नंदन जैसे गुमसुम सा हो गया।
नंदन बहुत दुखी होकर वापस घर चला जाता है। वो सोचने लगता है कि अब उसके परिवार का क्या होगा। फिर उसके घर मे रुपयों की परेशानी फिर से होगी,जिससे तकलीफों का सिलसिला फिर से झेलनी पड़ेगी। उसके बीवी बच्चे भूखे रहेंगे। रात भर नंदन यही सब बाते सोचता रहा और वो सो नहीं पाया।
सबेरा होते ही नंदन खेतों में जा पहुंचा। थोड़ी देर में ही मालिक का छोटा भाई और साथ में एक वकील साहब आते दिखे
मालिक का भाई – वकील साहब खेतों के काग़ज़ निकालिए।
और नंदन तुम इस पे अपने हस्ताक्षर करो।
नंदन- लेकिन मालिक मेरे हस्ताचर क्यों?

मालिक का भाई – भैया ने कुछ खेत तुम्हारे नाम कर दिए है। जो मुझे वापस चाहिए। इसलिए अभी हस्ताक्षर करो,ओर जल्दी से जी भी है ये सब बेच कर खत्म करे हम

वकील – नंदन क्या तुम य खेत वापस करना चाहते हो?
बड़े मालिक ने मृत्यु से पहले तुम्हारे नाम कुछ खेत कर दिए थे। और इस कागज में तुम्हारा नाम लिखा है। कानून के मुताबिक एक तिहाई खेत का मालिक तुम हो नंदन।

नंदन – चुपचाप हो गया,ओर अपने मालिक को याद कर उसके आंखो में आंसू आ गए।

तभी मालिक का भाई बिना कुछ बोले वहा से चला जाता है। और नंदन किसान (farmer) अपने मालिक को याद करके फूट- फूट कर खूब रोने लगता है। और अपने मालिक को आसमान की तरफ हाथ जोड़ कर धन्यवाद करता।

किसान (farmer) की कहानी से सीख

किसान (farmer) की कहानी सी हमे यही सीख मिलती है कि हमें अपने किसान (farmer) भाई को अगर मालिक की तरह खेत देकर मदद नहीं कर सकते है। लेकिन कम से कम उनकी इज्जत कर उनको सम्मान का भागीदारी वना सकते ही सकते है। ओर मदद के लिए कुछ तो सोचे। क्युकी आज जो हम अपने अपने घरों पर बैठे बैठे खा पी रहे है ये खाना पीना किसकी वज़ह से है इसको तो ध्यान में रखे हम। हम अपने जीवन के सुख सुविधाओं में इतना भी व्यस्त ना हो। कि अपने अन्न दाता को ही भूल जाए। बस इतना सी बात है इस कहानी की।

आज की अर्थव्यवस्था हमारे देश के किसानों (farmer’s) पर निर्भर करती है। हमारे देश के किसान(farmer) जो इतना मेहतन कर के फसल उत्पन्न करते हैं। जिनका हम रत्ती भर भी आभार नहीं व्यक्त करते है। हमे किसानों (farmer’s) का आदर सम्मान करना चाहिए। किसान (farmer) देश के मुख्य आधार शिला है। जैसा कि हमारे देश को (कृषक) कृषि प्रधान देश कहा जाता है। क्यों कि यहां भिन्न – भिन्न प्रकार की फ़सल पाई जाती है। फ़सल उगाना एक बहुत ही मेहनत और थका देना वाला काम है।लेकिन फिर भी हमारे किसान भाई फ़सल को उत्पन्न करने में काफी मेहनत करते है। और सुबह होते ही खेतों में फ़सलो को उत्पन्न करने के लिए उनकी देख – भाल के लिए निकल पड़ते है। और दोपहर तक कड़ी तेज धूप में खेतों में काम करते है। ताकि उनकी फ़सल अधिक मात्रा में हो और अधिक उपजाऊ हो। जिसके लिए उन्हें काफी मुसीबतों का सामना भी करना पड़ता है। जैसे- जंगली संड , नील गाय आदि जानवरो से फ़सल को बचना पड़ता है। हम सभी को किसानों (farmer’s) की वजह से ही अनाज सस्ते दामों में मिल जाता है।

किसानों (farmer’s) का मुख्य पेशा कृषि है। और उसके साथ पशुपालन भी करते है। जिससे उनको पशुओं से भी लाभ मिलता है जैसे कि गाय, बकरी और भैंस से दूध,बैल खेत जोतने और गाड़ी खिचने के काम आता है। और उनके गोबर से किसानों (farmer’s) को खाद मिल जाती है जिससे ये खाद उनकी फसलों को उपजाऊ बनाने के काम आ जाती है।

‌लेकिन आज भी हमारे देश के किसान (Farmer) अशिक्षित और गरीब है। आज भी किसानों (farmer’s) को उनकी फसलों का उचित दाम नहीं मिल पाता। किसानों (farmer’s) मुख्य रोजगार किसानी ही है लेकिन उन्हें अपनी द्वारा उगाई गई फ़सल का उचित दाम नहीं मिल पाता है। और इसी समस्या के रहते है वो अपने बच्चो को भी नहीं पढ़ा – लिखा पाते है। लेकिन उनके पास जो कुछ भी होता है। उतने में ही अपना सादा जीवन जीते है और खुश रहते है।

अगर आपको इस कहानी या किसी भी शब्द का भाव अच्छा लगा हो। तो एक बार अपनी प्रितिक्रिया देकर हमें जरुर बताए। ओर एक किसान के लिए सबकी सोच में परिवर्तन करने में मदद करे। अगर आपको हमारी बाते अच्छी लगी हो तो कृपया कॉमेंट करके दूसरो तक एक बार जरूर शेयर करे। आपका हर प्रतिक्रिया हमारे किए बहुमूल्य है।

धन्यवाद्!

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