कोरोना:मानव की रचना, कैसे और क्यों?

         कोरोना-corona  :मानव की रचना, कैसे और क्यों?

अहम थी ज़िन्दगी,अहम थे हम
बदल दिया कोरोना ने,
जीने का वेहम।

कोरोना का अर्थ(Meaning of corona): कोरोना को अगर समझे तो अर्थ यही निकलता है कि ( करो,ना ) अर्थात् प्रकृति मनुष्य कह रही है कि है कि मुझ पर जुल्म ना करो। इसीलिए कोरोना का प्रभाव (Effect of corona) है जो, उसका जिम्मेदार मनुष्य है। (मानव की मानवता का असर है कोरोना, प्रकृति पर अत्याचार करने का प्रभाव है, कोरोना)|

 

 Corona?
Forlic with nature

कोरोना(Covid-19) सिर्फ एक नाम है इस बीमारी का । असली कीटाणु तो,इस पृथ्वी पर हम मानव है,अब हाल ऐसा हो गया है कि हम इंसान की कीमत से ज्यादा एक कीटाणु की कीमत हो गई। अपने स्वार्थ के लिए हम इंसान कुछ भी करने को तैयार रहते है,जिसमें हमारा भला हो वो काम हमें करना ही होता है, चाहे किसी को उससे नुकसान ही क्यों ना हो। इसलिए हम कह सकते हैं कि हमारे लिए कोरोना एक सीख है हम मानव के लिए ये चेतावनी है। जो हमे अभी तक प्रकृति शायद समझा रही है।और अगर हम अभी भी नहीं समझे तो इसके प्रकोप (कोरोंना के प्रकोप) से हमे कोई नहीं बचा सकता ।

कोरोना-मानव पर अत्याचार कर रहा हर मानव है।

मानव की मानवता पर इतने सवाल क्यों उठते है ,अब एक मनुष्य दूसरे मनुष्य के उपर उंगली उठाने से पहले एक बार भी क्यों नहीं सोचता है, मनुष्य की सोच एक जंतु के समान क्यों होती जा रही है माना कि मनुष्य अपनी जरूरतें पूरी करने में यह सब करता है,लेकिन हर मनुष्य अपनी जरूरतें पूरा करने में इस कदर कैसे अंधा हो सकता है कि उसे सामने वाले की तकलीफ नजर ही ना आए, मानव की खुदगर्जी ने मानव को छोड़ो इस प्रकृति को भी नहीं छोड़ा है। इस प्रकृति ने हमें बहुत कुछ दिया है। परंतु हम मनुष्यों ने अपने फायदे के लिए जीव जंतु मनुष्यों के साथ-साथ इस प्रकृति का भी बहुत गलत फायदा उठाया है, जिसका परिणाम आज हम भुगत रहे हैं, जब एक इंसान दूसरे इंसान से अपना बदला लेना नहीं भूलता है, तो प्रकृति कैसे भूल सकती है। बस इंसान और प्रकृति में इतना फर्क है, इंसान अपने बदले तुरंत लेने की कोशिश करता है और प्रकृति एक साथ लेती है। लेकिन जब लेती है तब सभी को समझ आ जाता है,कहते हैं,ना-

सौ सुनार की एक लोहार की।

औेर ये बात आज पूरी तरह से सच हुई है, प्रकृति अपना बदला ले रही है या कह सकते हैं अभी भी चुनौती दे रही है, प्रकृति मनुष्य को समझाने का एक मौका दे रही है इस महामारी कोरोना के जरिए प्रकृति संदेश दे रही है, कि मनुष्य सुधर जाओ क्योंकि जब प्रकृति विनाश करेगी तब किसी की उसके आगे एक भी नहीं चलेगी। इसी पर एक कविता लिखने की कोशिश की है कृपया पढ़े और बताए कॉमेंट करके की कैसी है

कोरोना-corona
A human is a demon

कविता –

हे मानव तू दानव है

हे मानव तू दानव है,

खेल रहा था ,इस प्रकृति से तू

दिखा रहा था, रूप तू अपना

करता था मनमानी तू

अभी देख ले इस, प्राकृतिक को तू

झेल रहा हर मानव है-२

हे मानव तू दानव है

हे रूप बड़ा दानव से,

जो पहचान न पाया

,अपने अंदर के मानव को

हे मानव तू दानव है-२

राम के हाथों मर कर भी

रावण अमृत्व को प्रदान हुआ।

हे मानव

जीव जंतु से मरकर तू

स्वर्गलोक ही नहीं,

नर्कलोक का तू अभिशाप हुआ-२

हे मानव तू दानव है।

जब रावण जैसी बुद्धि का

पल भर में चकनाचूर हुआ

हे मानव

फिर क्यों इतना तू खुद से खुद में चूर हुआ

हे मानव तू दानव है।

जीव जंतु से भी बढ़ कर तू

इनका है अब बाप हुआ

अपनी शान ए शौकत में

अब देख यहां सर्वनाश हुआ

हे मानव तू दानव है

तुझे समझाने के लिए,

कोरोना का विकास हुआ।

घर में बैठ कर देखो तुम,

रामायण का फिर टेलीकास्ट हुआ।

फिर भी बात ना समझे तू

तो समझ तेरा विनाश हुआ-२

हे मानव तू दानव है।-२

ये एक मैसेज है जो मैंने अपने एक छोटे से सोच का हिस्सा (जो कविता ओर प्रेरण शब्दों से) आपके सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। मै आशा करता हूं कि आपको थोड़ा सा भी पसंद आए,अगर आपको अच्छा लगेगा तो मेरा लिखना सफल हो जाएगा।

अभी तक के सभी बात कहने का तात्पर्य यही है कि जिस स्थिति से हम सब गुजर रहे है उसके जिम्मेदार हम सब कहीं ना कहीं है इस परेशानी में भारत ही कोरोना से नहीं बल्कि पूरा विश्व इस महामारी से गुजर रहा है।जिससे दिन प्रतिदिन लोगो की मृत्यु हो रही है,और हम सब इतने सेहमे हुए है कि घर में रहने के लिए मजबूर है ना इस कोरोना की दवा अभी तक मिल पाई है। और मिलने की उम्मीद भी अभी तक नजर नहीं आ रही। यह सब हमारे कर्म है शायद,जो प्रकृति एक केहर के रूप में हमें समझा रही है।इसीलिए मै आप सभी से विनती करता हूं, कि कोई भी इंसान प्रकृति के नियमों के खिलाफ जाकर उसको नुकसान ना पहुंचाए। क्योंकि प्रकृति हमारे खिलाफ गई तो इसका अंजाम हम सभी देख रहे हैं। और अंत में बस यही कामना है कि जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाए,सभी को इस महामारी से निजात मिल जाए,और सभी एक बार फिर से खुशी का जीवन व्यतीत कर सकें

कृपया आप पढ़े ओर कॉमेंट करके जरूर बताएं। कि कैसा लगा आपको ,अगर कोई त्रुटि हो तो उसके लिए क्षमा चाहूंगा।आपकी राय हमारे लिए बहुमूल्य है

धन्यवाद्!

विचार: सोचने से ही देश है इसलिए अपने सोच को सोचने पर मजबूर कर दीजिए,और खुद को एक नई राह कि ओर अग्रसर करिए।

15 thoughts on “कोरोना:मानव की रचना, कैसे और क्यों?”

  1. ये सच हैं की इंसान अब बहुत मतलबी हो गया है और अपने मतलब के लिए किसी भी हद्द तक जा सकता है और यही हुआ है इसीलिए आज प्रकृति अपना बदला ले रही है अगर इंसान फिर भी नहीं समझ पा रहा इन सब मुसीबतों को देख कर तो सच में इंसान ने अपनी इंसानियत खो दी है आशा करता हूं कि आपकी कविता को पढ़ कर लोग खुद को सुधारने की कोशिश करेंगे और अपनी सोच को भी बदले ।

    Reply
  2. डियर जिंदगी , आपका ब्लॉग मानव की वास्तविक परिस्थिति का बोध कराता है !

    Reply
  3. बाते सारी क्षतिग्रस्त लेकिन कटु सत्य भी है
    बहुत सुंदर और सराहनीय है

    Reply
  4. आपके विचार इंसान की सोच एवं संसाधनों का का उचित अनुप्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता है

    Reply
  5. अगर यही सोच हर व्यक्ति अपने जीवन में अपनाएं तो हम प्रकृति को विशेष प्रकार के दुष्प्रभावों से दूर कर सकते हैं

    Reply
  6. Analysons donc cette derniere operation, la plus difficile et la plus penible de toutes, a cause du poids considerable
    de la piece, de l’etendue de la soudure et de son importance, puisque de la perfection de
    l’ouvrage resulte toute la force de la penture. herve leger outlet Aussitot qu’il sut ou demeurait le signor Ballondini, afin de le joindre plus
    vite, il monta dans un fiacre, en sorte qu’il arriva a son logement un quart d’heure apres son depart pour
    l’Italie, ou le signor Ballondini allait encore donner des concerts.

    Reply

Leave a Comment

%d bloggers like this: