कहानी kahani: अधूरे ख्वाब की

कुछ कहानी kahaniya अधूरे ख्वाब की भी।

एक ख्वाब, ख्वाब बन गया,

टूटा इस कदर की जज्बात बन गया।

समेट भी ना सका,उन जज्बातों को

ख्यालों ही ख्यालों में बस एहसास बन गया।

—– अधूरे ख्वाब की कहानी

कहानी kahani
                  Adhure Khawab

एक ख्वाब था, जो ख्वाब बन गया। आज इस ख्वाब को अपनी kahani से एक राह दे रहा हूं , एहसासों को शब्दों में पिरो रहा हूं। सभी को कभी ना कभी ऐसा ख्वाब ऐसी kahaniyan एक बार जरूर आती है,जो उसकी जज्बातों पर हावी हो जाती है। और वो जज्बात फिर एक एहसास का रूप लेकर उसके जीवन में हमेशा साथ रहता है। आज उसी अधूरे ख्वाब के साथ अपने कलम को, शब्दों से लिखकर इस ख्वाब को मुकम्मल करने चला हूं।

इस राह के राही को, इस अधूरे ख्वाब की कहानी को मुकम्मल करने के लिए हर उस शख्स की जरूरत है। जिसके ख्वाबों की दुनिया में कुछ अधूरा हो, उसे शब्दों में सजाकर यहां बयां कर अपनी kahani btao। शायद फिर वह ख्वाब पूरा हो जाए।

आज कलम की स्याही से वह ख्वाब लिखने जा रहा हूं। जो ख्वाब पूरा ही ना हो सका।

जिसे मैंने देखा नहीं महसूस किया, उस सपने की दुनिया में एक लड़की,जिसने कुछ ही पल में मेरे सपनों से बाहर की दुनिया में चैन उड़ा कर बेचैन कर दिया। कुछ ही पल थे, जो बेहद खूबसूरत थे। लेकिन अफसोस इस बात का है, कि अधूरा रह गया। पूरे ख्वाब की इल्तजा से पहले ही वो ख्वाब, ख्वाब बन गया। kahani pyar ki ।

तो अब बात करते हैं, उस खूबसूरत पल की जो महज एक ख्वाब था। जिसकी शुरुआत हमारी कक्षा 12 के स्कूल से हुई। हमारा स्कूल जो पूरा लड़कों का स्कूल था। जहां पर लड़कियों का नामोनिशान नहीं था। हमारी परीक्षाएं हो चुकी थी।( छुट्टियां हो गई थी) और अब वो स्कूल की यादें हमारे जेहन में थी। इन्हीं यादों के साथ एक वर्ष बीता। फिर हमने और हमारे दोस्त ने इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लिया।

एक दिन कॉलेज से लौटते हुए, हमें रास्ते में कुछ काम था। और वही रास्ते में हमारा स्कूल पड़ता था। वहा पर एक अंकल थे, गुड्डू अंकल, जो समोसे का मजा हम सबको लंच में दिया करते थे। वह हमें काफी मानते थे, हमने और हमारे दोस्त ने सोचा कि, बैग अंकल के पास रख देते हैं।

और वापस लौटते वक्त बैग ले लेंगे। और हमने कुछ ऐसा ही किया। हम अंकल के पास गए और बैग रखने के लिए कहा, और बोला अंकल थोड़ी देर बाद आकर ले लेंगे।

अंकल- रख दो बेटा,लेकिन जल्दी आना,मुझे जाना है।

हम– जी अंकल, जल्दी आ जाएंगे।

यही कहकर हमने बैग रखा और हम चले गए। हमें वापस लौटते वक्त थोड़ी देर हो गई,हम लोग जब स्कूल पहुंचे। तब अंकल वहां नहीं थे,वहां से जा चुके थे। लेकिन उन्होंने हमारा बैक अंदर रखवा दिया था, स्कूल में। वैसे तो सभी लोग वहां पर हमें पहचानते थे। लेकिन वहां पर कुछ नए लोग और नए नियम आ चुके थे। जिसकी वजह से वह हमें अंदर जाने से मना कर रहे थे, हमने उनसे विनती की और कहां हमारा बैग अंदर है प्लीज हमें अपना बैग लेने के लिए अंदर जाने दीजिए। काफी रिक्वेस्ट के बाद उन्होंने कहा कि एक लोग अंदर जाकर के बैग ले आओ। मैंने अपने दोस्त को कहा,मैं बैग लेकर आता हूं।

यह कहकर मैं बैग लेने के लिए अंदर गया, वहां जाकर के मेरी कुछ यादें ताजा हो रही थी, जीने से ऊपर गया जहा ठीक बगल में हमारा क्लासरूम हुआ करता था। मैं बैग ढूंढने लगा क्लास में, लेकिन मुझे बैग नहीं मिल रहा था।

तभी मेरी नजर अचानक क्लासरूम के गली की तरफ पड़ी है और मैं आश्चर्यचकित था,कि वहां अब हॉस्टल। नहीं समझे?

गर्ल्स हॉस्टल भैया गर्ल्स हॉस्टल।

तब मुझे समझ में आया कि, हमें अंदर जाने से क्यों मना कर रहे थे। मैं बैग की खोज में पूछने के लिए उस तरफ बढ़ा। वहा पर एक कमरे का दरवाजा थोड़ा सा खुला था, मैंने दरवाज़े को खटखटाया तो वह पूरा खुल गया

वहा बैठी एक लड़की जो किताबों के पन्नों को खोलें, किसी और खयालों में खोई थी, इसलिए शायद उसे आहट तक ना हुई मेरे कदमों की।

मैं- एक्सक्यूज मी!, फिर,एक्सक्यूज मी!

लड़की -घबरा कर, हां जी कौन?

मै-जी यहां कोई बैग है क्या? गुड्डू अंकल ने रखा है।

क्या मैं देख सकता हूं।

लड़की -हां क्यों नहीं, जरूर।

मैं बैग ढूंढने लगा लेकिन मुझे वहां बैग नहीं मिला। उसने कहा चलिए,मैं आपकी मदद कर देती हूं। शायद किसी और कमरे में रखा होगा। साथ ही उसने कई सवाल पूछे।आप क्या करते हैं? यहां कैसे?

मैंने उत्तर दिया – कि मैं यहीं से पढ़ा हूं,और अभी इंजीनियरिंग कर रहा हूं। बस कुछ काम था, रास्ते में तो। बैग गुड्डू अंकल के पास रख दिया। और उन्होंने यहां रखवा दिया,बस।

लड़की- that’s great इंजीनियरिंग।

उसने अचानक से पूछा चाय, चाय पिएंगे आप।

मैं ठहरा चाय प्रेमी, मना कैसे कर सकता था।

हिचकते हुए, जी जरूर।

फिर वह चाय बनाने के लिए आगे बढ़ी।और मैं वहीं बैठ गया। उसके किताब का एक पन्ना खुला था,जिस पर शायरी, कविता लिखी हुई थी। उसे देखने लगा।

वो मुझे देख कर बोली,यह शायरियां और कविता मेरे अंकल ने लिखी है। और मुझे Hindi kahani और कविता पढ़ने का शौक है।

तभी मैंने बोला लिखने का शौक तो थोड़ा सा मुझे भी है और बोला जज्बातों को कलम से शब्द बना कर पन्नों पर उतारने का अलग ही मजा है।

वो बोली तो कुछ सुना भी दीजिए?

मैं हिचकते हुए,हां क्यों नहीं। जरूर

उसे देख कर मुझे ख्याल आया, और उस खयाल को अपनी जुबान पर ले आया। एक छोटी सी लाइन सुनाई कि-

लगता है, मुझे मोहब्बत हो रही है

तुझे देखकर इस दिल की,कुछ हसरत हो रही है

तुम बैठी रहो, और मैं देखा करूं, यूं ही तमामउम्र।

इस दिल की बस यही ख्वाहिश हो रही है।

कहानी kahani
           Khawahishe Khawab Ki

 

उसके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान आई। जैसे बारिश की बूंदे पत्तों पर टिप टिप गिरती है,और वह पत्ता उन बूंदों को चुपके से शोक ले रहा हो। और इसकी खबर भी ना हो किसी को।

चाय अभी बनी भी ना थी। कि किसी के कदमों के आने की आहट हुई। मुझे लगा कोई कुछ बोल ना दे,इसलिए मैं बिना कुछ बोले उठ कर चुपचाप बाहर आ गया।

वह बोली, चाय!

लेकिन मैं बिना कुछ बोले तुरंत बाहर चला गया।

मैं उस इंसान से पूछने के लिए आगे बढ़ा। जिसके कदमों की आवाज से बाहर आ गया था ।

सर, क्या यहां पर कोई बैग रखा हुआ है ?

उन्होंने कहा,आओ मेरे साथ, मुझे बैग बताया, कि वहां रखा है, और चले गए।

पर मेरे मन में तो उस चाय का ख्याल था। जो मैं छोड़ कर आ गया था, मैंने सोचा वापस जाऊं, उसके पास फिर ख्याल आया की दोस्त इंतजार कर रहे हैं, वह गुस्सा हो रहे होंगे। मैंने उनको एक मैसेज कर दिया ।

और मेरे कदम आगे बढ़े ही थे,उस प्यारी सी लड़की के कमरे में जाने के लिए, लेकिन अचानक से कुछ ऐसा हो हुआ। जो मेरी बाहर की दुनिया को पल भर में बेचैन करके छोड़ दिया।

मेरी सपनों कि दुनिया अब हकीकत की दुनिया में तब्दील हो चुकी थी। शायद ये kahani kismat ki थी।

अचानक से मेरी आंखो का खुल जाना । जो मेरे बढ़ते कदम को,उसके दरवाजे पर लाकर खड़ा तो किया,लेकिन उससे मिल ना सका। अफसोस मुझे इस बात का है, वो मेरे लिए अब एक अधूरी कहानी सी बन गई थी। उसे दोबारा देखना मेरी किस्मत में शायद नहीं था। उस पल मै बिल्कुल थम सा गया और,कुछ समझ नहीं आ रहा था।

मेरी आंखों का खुलना जैसे ख्वाब नहीं मैं खुद टूट गया हूं । ऐसा लगा जैसे किसी kahani के बीच के पन्नों को किसी ने फाड़ दिया हो और उसे पढ़ने के लिए में बेचैन हुआ जा रहा हूं। फिर उस टूटे हुए ख्वाब को दोबारा से जोड़ने की कोशिश करने लगा।

किंतु जिस चीज के एक बार टुकड़े हो जाए,उसे समेटना और जोड़ना काफी मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाता है। और ये तो ख्वाब था,शायद इस ख्वाब का सफर यही तक था। और यह एक एहसास बनकर रह गया। मेरी जीवन की अनमोल कड़ी यह kahani बन गई।

उस ख्वाब की खूबसूरती सिर्फ और सिर्फ वह लड़की थी।

जैसे पद्मावती को देखकर चांद अपनी रोशनी को संपूर्ण जगत में बिखेर देता है। समुद्र के तट पर जाते ही समुद्र हेलोरिया मारने लगता है। इतनी सुंदर जिसके आगे सुंदरता भी घुटने टेक दे। कुछ ऐसी ही थी, वो लड़की जिसकी आंखों में तेज। उसकी हर वाणी पर जैसे चासनी घुली हो,मधुरता से भरी हो।

कहानी kahani
                    Khawab Thi Tu

मैं बयां भी नहीं कर सकता, उसको। की वो कितनी प्यारी थी। जैसे कोहिनूर

ऐसा कोहिनूर शायद ख्वाब में ही दिखता है । दुख इस बात का है कि वो ख्वाबों में आई, और ख्वाब बनकर चली गई।

उसकी चाय उसकी बातें और वो,मेरे ख्वाब को अधूरा छोड़ कर चली गई। कम से कम चाय का पल ही साथ गुजरा होता,काश कुछ और बाते साथ मे की होती। लेकिन वो काश, अब महेज़ एक kahaniyan के रूप में बन चुकी थी।

वो कुछ खास लगी थी मुझे, उसका नज़रों के सामने आना ऐसा लगता था। जैसे कोई परियो की रानी अपने उन तेज आंखो के जादू से मुझे मदहोश कर रही हो,ओर मे उसकी नैनो की जाल में फंसता चला जा रहा हूं।

मुझे इंतजार है, उस दिन का जिस रात वो फिर मेरी ख्वाबों में आए। और इस अधूरे कहानी के हर पल को पूरा कर दें। और मेरी बाहर की दुनिया के बेचैनी को दूर कर मुझे मुकम्मल करते कर दे।कहने को तो वो कहानी बन चुकी थी। लेकिन मेरे लिए एक ऐसी एहसास थी, जो शायद मिट नहीं सकती। इसलिए उसको इन शब्दों से लिखकर मुकम्मल करने की कोशिश कर रहा हूं। बस साथ चाहिए आप सभी का।

समाप्त

यह एक काल्पनिक कहानी है, लेकिन किसी ना किसी के जीवन से जुड़ी जरूर होगी। कुछ ऐसे ख्वाब जो हमारे जज्बातों पर असर कर हमें जीवन का आनंद कराती हैं,

और हमें खुद में खुद को ढूंढने में मदद करती हैं। अगर आपके पास भी कुछ ख्वाब या एहसास है, कुछ ऐसे पल जो खास हो या फिर इस कहानी को पढ़कर कुछ बातें हो कहने को। तो आपका स्वागत है, कमेंट करके जरूर बताएं । इसे दूसरों तक जरूर पहुंचाएं और इन शब्दों को एक नई राह दे।

और ऐसी ही कहानी हिंदी में पढ़ने के लिए हमारे साथ जरूर बने रहे

धन्यवाद!

3 thoughts on “कहानी kahani: अधूरे ख्वाब की”

  1. सच में ये कहानी बस एक अधूरा ख्वाब बन के रहे गई। कहानी काल्पनिक है लेकिन उस लड़की की सुंदरता की बाते पढ़ कर ऐसा लगता है कि वो कहीं न कहीं है जरूर ।

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