Love story of journey

SAFAR
                  LOVE STORY OF JOURNEY

सफरइश्क में,

इश्क मुकम्मल कहां होता है।

सफर, मुकम्मल हो जाए,तो

इश्क कहां होता है।

LOVE STORY OF JOURNEY
                            सफर ए इश्क

आज बताने जा रहा हूं एक Love story of journey जो बेहद खूबूरत story है। काफी पहले की बात है। जब मैं दिल्ली घूमने के लिए गया था। वहां चाची के घर , बुआ और फूफा से मिलकर बाकी जगह घूम कर मेरा वक्त वापस आने का हो गया था। मेरे पास पहले से टिकट नहीं था। मतलब की बुकिंग का टिकट नहीं था। मैं जब वापसी के लिए स्टेशन पहुंचा। वहां देखा इतनी भीड़ और उस भीड़ में पुलिस वाले, सभी को लाइन में लगवा रहे थे। जिसे देख कर मैं समझ चुका था।

कि बेटा बैठने के लिए सीट तो भूल ही जाओ। लेकिन ये ना मालूम था, कि ये सफर एक खूबसरत love story बनेगी। फिर ट्रेन आती हुई दिखाई दी, और पुलिस वाले किसी को भी बीच लाइन में घुसने नहीं दे रहे थे। जो बीच में जबरदस्ती घुसता उसके ऊपर लाठियों की बारिश कर देते थे। यह सब देख कर मैं सोचने लगा , भाई जाने को भी मिलेगा या नहीं कहीं पड़ गई। किसी पुलिस वाले की लाठी तो पड़े रहेंगे यही।

फिर ट्रेन आई और पुलिस वाले सभी को लाइन से लगाने लगे। मेरी बारी तक, ट्रेन में चढ़ने की जगह तक नहीं बची। मुझे लगा आज तो जाना शायद मुश्किल है। फिर मैंने देखा, अकेला में ही नहीं दो-चार लड़के और भी खड़े थे, मेरे साथ। और बोल रहे थे। यार ऐसे तो,मैं नहीं जा पाऊंगा। कोई जुगाड़ करना पड़ेगा। उन्होंने एक पुलिस वाले को देखा, और बोला चल भाई जुगाड़ बन गया। उनके साथ, मैं भी पुलिस वाले के पास गया। और वे लड़के पुलिस वाले से बात करने लगे।

लड़के पुलिस से – सर! कोई सीट हो तो दिलवा दीजिए वरना ऐसे कैसे जाएंगे।

पुलिस वाले ने पूछा – कहा जाएगा?

लड़के और मैं – सर ! लखनऊ

पुलिस वाला – रुको, और 500 लगेंगे।

सर इतने रुपए तो नहीं है। पुलिस वाला, जितने भी हैं दे। मैंने पुलिस वाले को 250 रुपए दिए। और उसने मुझे एक बढ़िया से सीट दिला दी। जिस पर मेरे अलावा एक अंकल आंटी बैठे थे। मैंने बोला चल अब चैन से सोते हुए सफर कट जाएगा।

मेरा सफर शुरू हुआ। साथ ही मेरी Love story of journey का भी सफर शुरू हुआ। मै आराम से बैठा था। पूरी ट्रेन एकदम भरी पड़ी थी। मेरे डिब्बे में भी लोग मेरी तरह लोग आने लगे। मैंने सोचा खैर मुझे क्या?, मैंने एक कोल्ड्रिंक खरीदी। और पीने लगा।

मुझे खबर तक ना थी, कि आगे का सफर इतना खूबसरत होगा कि मेरी रातों की नींद ही गायब कर सकती है। जहा मैं सोच रहा था, कि मैं सोता हुआ जाऊंगा। वहां, मैं पूरी रात जगता हुआ पूरा सफर करना पड़ा। मेरी आगे वाली सीट पर 3 लोग थे। जिसमें दो लड़कियां थी। एक लड़की जो मेरी उम्र की को बेहद खूसूरत अदाएं बिल्कुल अलग। यही से प्यारी सी love story की शुरुवात हुई।

जो अचानक से उठी,मेरी तरफ मुड़ी। और जैसे मेरी आंखो का उस पर पड़ना। हाय! सच् में एक पल मेरे दिल का खो सा जाना।

आंखों से आंखें क्या मिली, दिल को चुरने लगे धीरे – धीरे। मेरी निगाहें बस उसे देखे जा रही थी। अचानक उस लड़की ने कहा, इसक्यूज मी प्लीज़, यह सामान उठा दीजिए। मैं घबरा गया, मुझे तो लगा चपेट ना पड़ जाए।

हां क्यों नहीं, मैंने सामान उठा कर दिया। उसने कहा थैंक यू और बैठ गई। अब तो मेरे दिल की घंटी तो बज चुकी थी। और ये रेलगाड़ी का डिब्बा किसी खूबसूरत स्थान की तरह लगने लगा। आप ये Love story in hindi पढ़ रहे है,जो dear-zindagi.com पर है।तो बने रहिए हमारे साथ।

अब मैं बस उसकी सीट की तरफ निहारे जा रहा था। सोच रहा था, कब उसकी एक झलक दिखे। उसने मुझे निहारते हुए देख लिया था, शायद। जैसे वह अब नोटिस कर रही थी। उसने भी मुझे देखकर एक बार थोड़ी सी मुस्कान के साथ मुड़ गई। जैसे वो भी बार-बार देखने की कोशिश कर रही थी। मै तो मन ही मन फुले नहीं शमा रहा था। जैसे बोलना दोनों को ही लेकिन किसी की हिम्मत ना हो रही हो बोलने की।

क्योंकि उसके साथ उसकी बड़ी बहन और उसकी मां थी। जिस सीट पर वो बैठी थी। उसे छोड़कर अपनी बहन की सीट पर आ गई। जहां से उसका चेहरा साफ – साफ दिखाई दे रहा था। और वो भी मुझे देखने की कोशिश कर रही थी। लेकिन मुझे पता ना चले, इस वजह से मुझे इग्नोर कर रही थी। मेरी आंखें उसे लगातार देखे जा रही थी।

सब सो चुके थे वो भी एक तरफ सिर करके सोने का बहाना कर रही थी। मेरी आंखों पर नींद का नामोनिशान नहीं था। वो बार-बार इधर – उधर होती और अपनी हर अदा से मेरी नींद और दिल दोनों को उड़ा देती। ऐसे करते करते ना जाने दो से तीन कब बज गए, मुझे पता ही नहीं चला।

डर और शर्म के मारे मेरी हिम्मत तक ना हुई ,कि मैं उसका नाम ही पूछ लूं। नंबर मांगने की सोचता भी जैसे, वैसे ही कोई उठ जाता। सोचने लगता है,अगर मांगा नंबर तो, कहीं कुछ बोल ना दे। इस डर ने कब ट्रेन को लखनऊ लाकर खड़ा कर दिया। कुछ पता ही ना चला।

शायद यही डर उसके अंदर भी था। ट्रेन लखनऊ पहुंच चुकी थी। पर मेरा दिल उतरने का ना था। मुझे पता ही ना चला समय का कि कब इतना लंबा सफर तय हो गया। लेकिन उतरना तो था ही।

मैं बस यही सोच रहा था। काश खुद नंबर दे देती वो मुझे। मैंने बैग उठाया,और उसे देखते हुए। गेट के नीचे वहीं खड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद वो लड़की खिड़की की तरफ आ गई और मैं बस उसे देखे ही जा रहा था,और वो मुझे। शायद कुछ ना कह कर हमारी आंखें बहुत कुछ कह रही थी। लेकिन हमारे इस डर ने मुझे रोक रखा था।

यूं ही देखते – देखते ट्रेन का हॉर्न बजा,और ट्रेन धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी। मैं भी ट्रेन के साथ चले जा रहा था। और उसे देखते जा रहा था। लेकिन कुछ कहूं यह हिम्मत तो अभी तक ना हुई। ट्रेन तेज हुई और मैंने दौड़ना शुरू किया। उसे देखते – देखते जुबान की खमोशी इस दिल पर भारी पड़ गई। और आंखों से आंखे मिलती हुई वो चली गई।

इश्क़ ए मंजर पर एक

सफर शुरू हुआ था।

मुझे मालूम भी ना था,

कि सिर्फ वो महेज एक मुलाकात होगी।

सफर ए इश्क
                         इश्क़ ए मंजर

काश थोड़ी सी हिम्मत कर अपने डर को किनारे कर के थोड़ा सा बात कर लेता। तो शायद वो याद बनकर ना रहती लेकिन किस्मत के आगे कहा किसी की चलती है। ये सफर मेरे पूरे जीवन का अभी तक का सबसे खूबसूरत सफर था। मुझे कभी भी इतना अच्छा सफर नहीं लगा। अब बस वो और उसकी यादें और ये खूबसूरत सफर मेरी यादों में है। जो कुछ लब्जो में व्यक्त किया है। ऐसी थी मेरी Love story जो मेरे पूरे सफर को यादगार बना दिया। मुझे नहीं पता वो भी सोचती होगी, जैसा मै बोल रहा। आप लोग बताईए क्या वो भी ऐसा ही बाते करती होगी। अगर हा तो आप लोग कमेंट करके बताईए।

ये थी मेरी छोटी सी Love story of journey जो ट्रेन में शुरू हुई। और वही खत्म हो गई। इसलिए दोस्तो अगर आपके साथ ऐसा होता है, तो हिम्मत कर बात आगे जरूर कर लेना। और साथ ही इस love story को शेयर करना ना भूले। मिलते है,इसी के साथ अगली प्यारी से कहानी में। तब तक के लिए पढ़ते रहिए dear-zindagi.com पर यूंही दिलचस्प कहानियां, जो शायरी और कविताओं से जुड़ी है।

धन्यवाद !

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