आज सास बहू की कहानी लेकर आया हूं। यह कोई नई बात नहीं है कि सास बहू के बीच लड़ाई हो। सास अपनी बहू को बेटी की तरह ना मानकर बहू की तरह पेश आती है। जिसके चलते बहुओं के मन में अपनेपन का जज़्बात खत्म होने लगता है। फिर घर में प्रतिदिन कलेश का माहौल बना रहता है। बस इसी विषय पर एक छोटी सी कहानी लेकर आया हूं। मैं आशा करता हूं आप सब पड़ेंगे और आपको अच्छी लगेगी।

सास बहू की कहानी
             Saas Bahu Ki Kahani

‌एक घर,जिसमें एक मां और उसके चार बैठे रहते थे। जिसमें से तीन की शादी हो जाती है। और वो तीनो अपनी-अपनी बीवी को लेकर शहर में रहने लगते हैं।

छोटे वाले लड़के की भी शादी के बात चलने लगती है। शादी तय हो जाती है। शादी की दिनांक 2 महीने बाद की होती है। लड़का अपनी होने वाली बीवी से बात करने लगता है। कभी-कभी सांस भी अपनी होने वाली हू से बहुत प्यार से बात करती हैं। सास अपने होने वाली बहू से बहुत प्रसन्न रहती है। और सभी से बढ़ाई करती है।

कि मेरी यह छोटी बहू बहुत सभ्य , सुशील और समझदार है। मेरा सारा कहना मानती है और मेरी बातों को समझती है। उन तीनो बहुओं की तरह नहीं है जो आए दिन मुझसे लड़ती रहती हैं। और फिर मेरे लड़को को अपने वश में करके दूर शहर चली गई। उन से लाख गुना अच्छी मेरी यह बहू है।

सास अपनी होने वाली छोटी बहू के तारीफों के पुल बांधने से फूले नहीं समाए। आखिर वह दिन आ ही गया जब छोटी बहू का स्वागत सास ने अपने हाथों से किया। छोटे लड़के की शादी संपूर्ण होकर बहू घर में आ जाती है। सास बहू के पास जाती है।

‌सास- बहू तुम काफी थक गई होगी। और कुछ खाया भी नहीं होगा। चलो कुछ खा लो फिर आराम कर लेना।

बहू – जी मम्मी जी

इसी तरह कुछ दिनों तक चलता रहा। सास नई बहू पाकर मन ही मन खुश थी। कि अब तो मेरी सेवा होगी। सब कुछ मेरे हिसाब से होगा। लेकिन छोटी बहू थोड़ा नादान थी। नए रिश्ते में आना। सब लोग नए, अनजान सब कुछ उसके लिए नया था। जिसके चलते उसे थोड़ी तकलीफ हो रही थी। और कुछ काम गड़बड़ कर देती। सास से उसकी इन सारी गलतियों को कुछ दिनों तक अनदेखा किया। और सोचने लगी आज मेरी बहू मेरे पैर दबाने आयेगी। तब उसे समझा दूंगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी तरह कई दिन बीते।

बहू दिन भर घर का काम करती जैसा समझ आता करती। और फिर थक कर सो जाती। जिससे सास को अब उसका व्यवहार समझ से परे हो रहा था।

एक दिन उसका बेटा शाम को बैठा था। तभी उसकी मां आयी और बोली।

मां- बेटा, बहू कुछ करती ही नहीं है। उसे समझाओ थोड़ा बहुत। क्या कैसे करना सबका ख्याल रखे। यही बात कह कर मां चली जाती है। रात होती है लड़का अपनी बीवी से कहता है।

लड़का तुम मां का ख्याल क्यों नहीं रखती हो, उनका ध्यान रखो।

बीवी- कैसा ख्याल अब और रखूं। वो जो बोलती है, वो बनाती हूं। घर का पूरा काम करती हूं। और कैसे ध्यान दू।

लड़का – मां के पैर भी दबा दिया करो वो खुश हो जाएंगी।

बहू- दिन भर, मैं घर का सारा काम करती हूं। फिर चलू पैर दबाऊ। मैं थकती नहीं हूं क्या। क्या शादी इसीलिए कि थी।कि मैं तुम्हारे घर की नौकरानी बन के रहू।

मुझे क्या तकलीफ है और क्या चाहिए। ये तो न कभी आप पूछते तक नहीं है, और न ही मां जी पूछती है। और शिकायत तुरन्त कर देती है।

उधर उसकी मां दिन प्रतिदिन उससे शिकायत करने लगी। लेकिन लड़का किसकी – किसकी सुने। ऐसे ही धीरे – धीरे सास और बहू का आपस में लड़ना शुरू हो गया। घर में अब रोज लड़ाई होना नियम बन गया। आपस में समझ कर लड़ाई कम करने के बजाय,उन्हें अब लड़ाई करने का बहाना चाहिए होता था।

लड़का रोज काम से थक कर घर आता। तो घर में सास बहू कि लड़ाई झेलना पड़ता। कभी मां बोलती तो कभी बीवी बोलती। लड़का किसकी तरफ से कैसे बोले।

आखिर जब मां को समझाएं तो मां बोले तू तो बीवी का गुलाम हो गया है। तुझे कहा उसकी गलती नज़र आयेगी। बीवी को समझाएं तो बीवी बोले। हा हा अपनी मां को लेकर ही रहो। मुझे छोड़ दो। वैसे भी मैं तो सिर्फ एक नौकरानी ही तो हूं। इस घर की।

Saas Bahu Ki Kahani
                     Pareshaan Adami

एन दिन इसी लड़ाई से परेशान होकर लड़का अपनी मोटर साइकिल उठाता है। और बाहर चला जाता है घर की लड़ाई से परेशान उसके दिमाग में सारी बाते चल रही होती है तभी उसका ध्यान मोटर साइकिल से हट जाता है। और तेज रफ्तार से सामने अचानक से एक बूढ़ा व्यक्ति नजर आता है।

वो ब्रेक मारता है जैसे ही ब्रेक दबाता है, मोटर साइकिल पूरी तरह पलट जाती है। वो गिरता और फिर तुंरत उठ जाता है। लेकिन उठते ही बेहोश हो जाता है। उसे कुछ लोग वहा के हॉस्पिटल पहुंचते है। जब उसकी आंखे खुलती है तो वो खुद को अस्पताल में पाता है। और पाता चलता है कि उसके बचने की उम्मीद बहुत कम है।

लेकिन भगवान की कृपा के आगे किसकी चलती है। वो बच जाता है इतना सब हो जाने के बाद भी सास और बहू की लड़ाई कम नहीं होती। न उसकी मां ने सोचा और न ही उसकी बीवी ने सोचा की अब तो लड़ाइयां बंद कर दे।

मेरी वजह से आज ये हालत हुई है। लेकिन खुद के आगे दूसरे कि पीड़ा नजर नहीं आती। और आज भी वो लड़का (आदमी) बीवी और मां की बीच पीस रहा है।

इस कहानी से बस यही समझना चाहता हूं कि न कोई बहू परफेक्ट होती है और न कोई सास। लेकिन दोनों अगर एक – दूसरे को समझ कर एक दूसरे की गलतियां बताकर उसे सुधारने की कोशिश करें।

तो शायद ऐसी लड़ाइयां ना हो। सास बहू की लड़ाई की कहानी हर एक घर की कहानी बनती जा रही है। एक चीज और कहना चाहूंगा।

जो बेटा अपने मां-बाप की सेवा खुद नहीं करता। उसे कोई हक नहीं, कि पराए घर से आई हुई लड़की से अपने मां-बाप की सेवा करने को कहें। किसी भी पराए घर की लड़की। जो बीवी है तुम्हारी। तुम जब तक अपने मां बाप की सेवा खुद नहीं करते हो तो उससे क्यों उम्मीद लगाते हो।

वो कोई गुलाम बन कर नहीं आती हैं। इसलिए खुद सेवा करोगे तभी दूसरे से उम्मीद करो। वरना ऐसा करना मेरी नजर में गुनाह है। बात समझो तो बहुत बड़ी है वरना एक शब्द है।

Share this:

Like this:

Like Loading...
%d bloggers like this: