मां की कहानी 

 मां की कहानी 

छोटे शब्दों से बड़ी बात कहने आया हूं ,

मां की कहानी का एहसास लिखने आया हूं।

मां की कहानी 
                         मां की कहानी

एक मां की कहानी जो अपने पूरे जीवन संघर्षों से लड़ती रही। लेकिन कभी सुख ने उसके जीवन में दस्तक ना दिया। कभी सांस, कभी सांस के बच्चे, कभी पति की सेवा करते – करते,अपनी खुशियों का खयाल तक ना रहा।

वो खुशियों से अनजान थी। कि खुशी का पल होता कैसा है। उसे मालूम ना था शायद। बस सब खुश रहें, यही चाहती थी। और उनकी खुशी के लिए हर काम करती थी। चाहे उस काम से उसी को ही क्यों ना तकलीफ हो। शायद इन संघर्षों ने उसे इतना कठोर बना दिया। कि इन सभी के बीच अपने जीवन को भूल चुकी थी।

फिर एक दिन ऐसा आया जब औरत को सबसे ज्यादा खुशी होती है। जब वो मां बनने की खबर पाती है उसके जीवन में ये पल आया। उसे एक बच्चा की प्राप्ति हुई, अब एक औरत जो इतने ज़ुल्मो से घिरी हुई थी। जैसे मां का रूप लेते ही उसे जीने का एक सहारा मिल गया हो।

धीरे-धीरे समय गुजरता जा रहा था। और बच्चे भी बड़े हो रहे थे। एक तरफ परिवार तो दूसरी तरफ एक मां अपने बच्चे को पढ़ाई लिखाई को लेकर परेशान। उस मां के कुछ सपने थे । कुछ उम्मीदें थी, जो उन उम्मीदों की आस अपने बच्चे से लगाई थी। और इस आस को पूरा करने के लिए वहां उस दलदल ( घर ) से निकलना बहुत जरूरी हो गया था।

यही सोच – सोच कर एक दिन उसका डर एक हौसला में बदलता नजर आया। और अपने बच्चे के लिए संपूर्ण परिवार से लड़ी। और आखिर में उस घर को छोड़कर अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए शहर आ गई।

शहर में वो बिल्कुल अनजान थी। और शहर उसके लिए अजनबी था। अनजान जगह पर अपना बसेरा उसके लिए एक चुनौती थी। लेकिन यह चुनौती उसके बच्चों से बड़ी नहीं थी। कुछ रुपए लिए हुए, एक मां अपने बच्चों के साथ एक नए शहर में नई उम्मीद के साथ अपने बच्चे को आगे बढ़ाने की कोशिश में लग गई।

शहर तो आ गई लेकिन उसे अभी तक कुछ पता ना था कि कैसे क्या होगा। धीरे-धीरे, जो रुपए थे अब खत्म होने आए थे। इस शहर में रहना था तो रुपए चाहिए था। इसके लिए वो काम की तलाश में इधर-उधर भटकने लगी।

फिर जाकर एक हॉस्टल में खाना बनाने का काम लगा। उसकी मजबूरी एक जुनून बन चुका था,पूरी ईमानदारी के साथ काम को करती ओर फिर महीने का वो आखिरी दिन आया जिस दिन उसे अपनी पहली तनख्वाह मिली। तनख्वाह मिलते ही उसके मन में एक खुशी सी उभरी जैसे उसने सफलता की एक सीढ़ी पार कर ली हो।

उन रुपए से अगले दिन सबसे पहले उसने अपने बच्चे का दाखिला एक स्कूल में कराया। वो दिन उसके लिए खुशी का सबसे बड़ा दिन था, अपने बच्चे को खुश देख जैसे वह फूले नहीं समा रही थी। वह इस खुशी के लिए जन्मों – जन्मों जैसे खुद को कुर्बान कर सकती थी।

इस उम्मीद में वो दिन प्रतिदिन खुद को जलती रही कि एक दिन ऐसा आएगा। जब उसकी थोड़ी-थोड़ खुशियो पर कट रहे दिन पर एक दिन उसे गर्व होगा। ऐसे ही समय बीतता गया। उसके हर संघर्षों को उसके बच्चों ने हर दिन देखा था। महसूस किया था, बच्चे ने अंदर ही अंदर ठान लिया था। कि कुछ ना कुछ करके पहले मां का काम छुड़ाना है। यह शायद उसका सपना बन चुका था। लेकिन सपने पूरे होते हैं या नहीं इस बात से वह अनजान था।

लेकिन अपने मां के दर्द भरे संघर्ष को देख देख कर उसके अहसास अब शब्दों का रूप लेने लगे । वो जो कुछ भी सोचता है अहसास होता। उसे कलम की मदद से पन्नों पर उतार देता। इसी तरह उसने अपनी मां के लिए छोटी सी कुछ पंक्तियां लिखी। इन पंक्तियों में सिर्फ शब्द नहीं हर वो पल का एहसास उसने लिखा। जो उसने अपनी मां के साथ गुजारा। उसके सभी दर्द को अपना दर्द समझ बस पन्नों पर उतारने लगा। इसी तरह मां के लिए उसने पहली छोटी सी दर्द से भरे एहसासों को लिखा। आइए एक बार पढ़ते हैं।

कविता

 

मां से बढ़कर और क्या चाहिए

मुझे ना जन्नत

ना कोई इंसान चाहिए

मुझे तो मेरी मां और

उसी का बस आंचल चाहिए।

मां की कहानी 
                                Maa

मेरी मां

खुशी का पल हो,या गम का पल हो

हंसती भी है हंसाती भी है,

अपने दर्द को वो छुपाती भी है।

ना जाने क्या खास है,मां तुझमें,

मेरी बताने से पहले

मेरी सभी बातें जान

जाया भी करती है।

क्यों मेरे रोने से पहले ही

तुम रो दिया करती हो मां।

खाना कम पड़ जाने पर मुझे खिला कर

कहती हो मुझे भूख नहीं है,

यही कहकर एक प्यारी मुस्कान

के साथ दूसरे काम करने

चली जाया भी करती हो।

मेरे सभी दर्दों को अपने

दर्द का हिस्सा बना लेती हो मां।

वो मां ही है जो हंसती है और हंसाती भी है

और अपने आगे का खाना

अपने बच्चों को खिलाती भी है।

दिन भर काम करके क्या वो थकती नहीं है,

लेकिन ना थकने का बहाना क्या खूब बनाती भी है

वो मां ही है

जो हंसती भी है, और हंसाती भी है

और अपने दर्दों को छुपाती भी है।

मां की कहानी 
                  Meri Pyari Maa

इस पंक्ति से शायद आप खुद को जोड़ पाए हो। अगर आप अपनी मां के साथ कुछ इसी तरह का प्यार है। इस कविता के बाद उस बच्चे में एक नई उम्मीद और कुछ कर दिखाने का उत्साह जगा। और वह लगातार आज प्रयास करता जा रहा है। कि अपनी मां के संघर्ष पर खड़ा उतरे ओर गर्व महसूस करा सके।

उसके हर प्रयास में हमेशा उसकी मां साथ रहती है,बस इस मां का संघर्ष आज भी जारी है। इसी संघर्ष को खत्म करने के लिए उसके बेटे ने भी खुद से एक लड़ाई छेड़ी है। ओर लड़ रहा है उसे जीतने का प्रयास वो हर पल करता है, और करता रहेगा।

जब तक संघर्षों का सिलसिला उसकी मां के जीवन से मिटा ना दें। शायद किस्मत का खेल बहुत बड़ा है जिस दिन किस्मत पलटी उस दिन संघर्ष का सिलसिला खत्म होगा । उस पल का इंतजार अब उसे है और उसकी मां को भी।

बस इतनी सी कहानी है उस मां की है । जिसने अपने संपूर्ण जीवन में खुशियों को नहीं देखा। संघर्ष से भरे जीवन की लड़ाई लड़ती रही। और अभी भी लड़ रही है । यकीनन एक दिन उसका संघर्ष एक सफलता में तब्दील होगी।

समाप्त

हर मां अपने बच्चो की खुशियां, आगे बढ़ता देखना चाहती है हर मां अपने बच्चो की खुशी के लिए अपने जीवन का त्याग करती है।

ऐसी कहानी हर मां के जीवन की होती है बस थोड़े से छोटे शब्दों से मां की कहानी को लिखा है। अगर आप इस कहानी को पढ़ कर अपनी मां के लिए कुछ कहना चाहते है। तो जरूर कॉमेंट करिए। कर अपने दिल की बात को शब्दों से लिख अपने जज्बातों को बयां करिए।

क्यों कि सब अपने दिल की बात अपनी मां से नहीं कह पाते। तो आपका स्वागत है, अगर आपके मन में कुछ बाते है जो आप कहना चाहते है। और एक प्रतिलिपि अपनी देकर इस कहानी को दूसरो तक जरूर पहुंचाए (शेयर)।

धन्यवाद!

इसी तरह आपके सामने हम रोमांचक कविता कहनियां ओर शायरियां लाते रहगें। बस थोड़ा सा साथ देते रहिए। ओर हमारे साथ बने रहे।

3 thoughts on “मां की कहानी ”

  1. जीवन में मां का स्थान सर्वोपरि है, बहुत खूब लिखा है आपने मां और उनकी ममता के संदर्भ में !!

    Reply

Leave a Comment

%d bloggers like this: