बेजुबान जानवर की कहानी

बेजुबान जानवर (हाथिनी) सत्य घटना की काहानी

कर जुल्म बेजुबानों पर,

खुद को इंसान समझ बैठे है।

बराबरी तो इनकी खुद से भी नहीं,

और खुद को बड़ा महान समझ बैठे है।

बेजुबान जानवर की कहानी

                                                                                                                            बेजुबान जानवर

इंसानों ने अपने दुष्कर्मों की सभी हदे पार कर दी।आज ऐसी कहानी उस बेजुबान जानवर की है, जो हम इंसानों को सोचने पर मजबूर कर दी है कि क्या हमारी इंशिनियत इस हद तक गिर गई की,किं अब सिर्फ और सिर्फ अपने मज़े के लिए अब किसी को भी नहीं बक्स रहा है इंसान।

बेजुबान जानवरो के बेजुबानी का फायदा तक उठाने लगा है इंसान। यह कहानी उस जीव की है। जिसे मैं कहानी नहीं कह कर इसे एक सच्ची घटना कहूंगा। जो हाल ही में हुई है घटना है। जिसकी कोई गलती ना होते हुए भी उसके साथ बुरा किया गया।

क्या मानव, मानव के मज़े के लिए काफी नहीं था ? जो अपने मनोरंजन के लिए अब बेजुबानों को मारना शुरू कर दिया। और ऐसी घटना ओर शर्मशार करने वाली हो जाती है जब केरल जैसे शिक्षित राज्य में ऐसी घटना हो। जहा पर 90% से ज्यादा लोग पढ़े लिखे हो। जब इन जैसे पढ़े लोग ऐसा कर सकते है,तो बाकी से क्या उम्मीद रखी जाए।

बेजुबान जानवर की कहानी
                         गर्भवती हाथिनी

ऐसा एक गर्भवती जानवर के साथ हो,ये पूरी इंशनियत पर दाग है। ये कितना निंदनीय घटना है, आइए पढ़ते हैं, इस बेजुबान की कहानी (घटना जो कि सत्य पर आधारित है)। जिसे मैं अपने शब्दों में बयान करना चाहता हूं । जिसकी चिखो का हम इंसानों पर फर्क ना पड़ा ।

यह कहानी (घटना )केरल के मलप्पुरम जिले की है। जहां पर कुछ बेजुबान जानवर रहते थे। उन्हीं जानवरों में एक हथिनी थी। जो अपने परिवार के साथ खुश थी। और उसके घर में खुशखबरी आने वाली थी। एक दिन हथिनी खाना ढूंढने के लिए निकली, और ढूंढते – ढूंढते किसी पास के गांव में जा पहुंची। जहां पर कुछ इंसान अपने इंसान होने की इंसानियत भूल बैठे थे। वहीं इंसान जब आते हुए,हथिनी को देखा। तो उन इंसानों ने उस हथिनी को अपने मजे का जरिया बनाया। हथिनी को आते देख उन इंसानों ने सोचा क्यों ना, इसका शिकार किया जाए।

एक इंसान दूसरे से –क्यों ना हमारे पास दीपावली के जो पटाखे और बारूद रखे हैं उसे लाकर दगाया जाए ।

दूसरा इंसान- हा,हा चलो थोड़ा मज़ा लिया जाए।

हथिनी को खबर तक ना थी, की सामने बैठे इंसान उसी के मौत का जाल रचने जा रहे है वो इन सब से अनभिज्ञ अपने मज़े में खाना की तलाश कर रही थी। उस खबर तक ना थी, की पल भर में उसकी सभी खुशियों पर ग्रहण लगने वाला है।

उन इंसानों ने अपने मनोरंजन के लिए अपनी इंसानियत का ख्याल नहीं आया। और एक अननास में पटाखे और बारूद भरकर उस भूखी हथिनी को खिलाने के लिए आगे बढ़े ओर जैसे ही जैसे ही उस हथिनी ने अननास खाया।

उसके मुंह में ही एक धमाका हुआ। जिससे खुशियां पल भर में तहस नेहस हो गई। वो हथिनी दर्द से तड़पते हुए इतनी बैचेन थी लेकिन वो इंसान अपने मजे के लिए देखते रहे । फिर वहां से भाग गए। उस हथिनी को दर्द का अहसास किसी को ना था।
इस दर्द में उसे अपनी परवाह ना थी, पेट में पल रहे अपने बच्चे को बचाना चाहती थी। शायद उसे पता था, कि मेरा बचना मुश्किल है । क्योंकि उसके जबड़े बुरी तरह फट चुके थे ।
तभी उसे एक नदी दिखाई दी,वह उस नदी में जाकर खड़ी हो गई। इसलिए क्योंकि उसके पूरे मुंह में पटाखे और बारूद फटने की वजह से उसके पूरे शरीर में जलन हो रही थी । और उसका असर उसके बच्चे पर होने लगा था। इसीलिए इस जलन से अपने बच्चे को बचाना चाहती थी। जिससे वह नदी के बीचों – बीच जाकर खड़ी हो गई , जिससे उसके बच्चे को ठंडक महसूस हो सके।उस हथिनी ने अपने अंतिम सांस तक बच्चे को बचाने के लिए प्रयास किया। लेकिन अंत में वह प्रयास एक अंतिम सांस लेकर इस दुनिया से अलविदा कह दिया।

बेजुबान जानवर की कहानी
          एक आवाज़ बेजुबान हथिनी के लिए ।

शायद वह हथिनी उन इंसानों के आगे चिल्लाई होगी, रोई होगी। लेकिन उन इंसानों को अपने मनोरंजन के आगे उसका दर्द , उसकी चीख का कोई असर तक नहीं पड़ा था । क्योंकि वह बेजुबान थी इसलिए । कहने को तो बेजुबान थी। लेकिन उसकी जुबां पर जो दर्द था, वों हम इंसानों ने दिया था।
कहते हैं इंसान के पास दिल है। और उस दिल से सभी के एहसासों को समझा जाता है। लेकिन शायद ऐसा है ही नहीं । क्योंकि हम इंसान सिर्फ अपनी भाषा, अपने दर्द और अपने एहसास समझते हैं । हमें किसी के दर्द से कोई मतलब नहीं है।

हमें तो बस सुख सुविधाएं और अपने मनोरंजन दिखते हैं । जिसके लिए हम उन भोले जानवरों तक को इस्तेमाल करते हैं। कभी पिक्चरों में तो कभी सर्कस में तो कभी घर में तो कभी उसे कैद खाने चिड़ियाघरो में। इन भोले जानवरों को हम इस्तेमाल कर अपनी सुख सुविधाएं पा लेते हैं । और काम निकालते ही मार देते हैं या घर से बाहर कहीं अनजान जगह पर छोड़ आते हैं। आखिर उस हथिनी का दोष क्या था। कि वह भूखी थी या फिर खाने के लिए बाहर आई। जो उसके साथ ऐसा दुष्कर्म व्यवहार किया गया।

हम इंसान इतना गिर चुके हैं कि कभी सुधरने वाले नहीं है ।भूकंप, तूफान और विश्व व्यापी बीमारी कोरोना सिर्फ और सिर्फ समझा रही है। कि हम इंसान सुधर जाएं। वरना हम इंसानों का क्या होगा, ये कोई सोच भी नहीं सकता।ओर इसके जिम्मेदार हम खुद होंगे।
हर इंसाफ सिर्फ इंसानों के लिए ही क्यों होते है क्या वो बेजुबान जानवर को दर्द नहीं होता क्या? उनके अधिकार नहीं होते ,आज शायद पहली बार नहीं हुआ कि कोई जानवर मारा गया है,लेकिन उनके लिए हम आवाज़ नहीं उठाते, आखिर क्यों? क्या दर्द सिर्फ इंसान को होता है? परिवार एहसास और जज्बात उनके नहीं होते?
हमें कोई फ़र्क क्यों नहीं पड़ता किसी जानवर के मारने पर,इंसान के साथ कुछ होता है,तो हम दूसरे दिन इंसाफ मांगने लगते है,ओर अगर इंसाफ जानवर के लिए हो तो उसे पल भर में भुला देते है।
जंगल के जीवों की सुरक्षा करना हमारा एक कर्तव्य है, लेकिन हम अपने कर्तव्य से भाग रहे है,आखिर उस गर्ववती हथिनी की गलती क्या थी। जो उसके साथ ऐसा हम इंसानों ने किया।
अब हमे उस बेजुबान हथिनी को इंसाफ दिलाने के लिए आवाज़ उठानी होगी, ओर अपने किए हुए गलती का पश्चाताप करना होगा। और आगे से ऐसा ना हो इस बात का खयाल रखना होगा।

                                                                                                                                                                                           धन्यवाद्!

                                                                                            एक आवाज़ बेजुबान हथिनी के लिए ।

2 thoughts on “बेजुबान जानवर की कहानी”

  1. कुछ इंसान अब अपनी इंसानियत खो रहे है और अगर ऐसा ही रहा तो वो दिन दूर नहीं जब सभी इंसान जाति का पतन होगा। विश्व व्यापी बीमारी कोरॉना होने की वजह यही है कि बेजुबान जानवर को परेशान करेगा तो हम इंसानों के लिए ऐसी समस्याएं बनती रहेगी और इन सभी समस्याओं की सिर्फ और सिर्फ इंसानों कि जाति ही हैं।

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